कदवारा से उठी हुंकार: “अब नहीं सिर्फ आश्वासन—विस्थापितों को चाहिए समयबद्ध न्याय!”

✍️ डॉ. महेश प्रसाद मिश्रा, भोपाल

छतरपुर/किशनगढ़।
विस्थापन, अधूरे मुआवजे और प्रशासनिक उदासीनता से आक्रोशित किसान-आदिवासी अब निर्णायक संघर्ष के मूड में हैं। जय किसान संगठन के बैनर तले सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर के नेतृत्व में चल रहा न्याय सत्याग्रह आज 28 अप्रैल को कदवारा गांव में विशाल महापंचायत के रूप में उभरने जा रहा है। हजारों की संख्या में जुटने वाला यह जनसैलाब अब केवल विरोध नहीं, बल्कि अपने अधिकारों की अंतिम लड़ाई का ऐलान माना जा रहा है।

यह महापंचायत एक साधारण सभा नहीं, बल्कि वर्षों से उपेक्षित विस्थापित गांवों की सामूहिक चेतना का विस्फोट है—जहां अधूरे सर्वे, अपूर्ण मुआवजा, मनमानी कार्यप्रणाली और प्रशासनिक तानाशाही के खिलाफ गूंजती आवाज अब पूरे बुंदेलखंड में संघर्ष का केंद्र बनती दिख रही है।

संवाद हुए, वादे मिले… लेकिन जमीनी हकीकत शून्य-15 अप्रैल को आंदोलनकारियों और प्रशासन के बीच संवाद हुआ, 16 अप्रैल को भरोसे के साथ आंदोलन स्थगित किया गया। प्रशासन ने 7 दिन मांगे, संगठन ने 10 दिन दिए।

गांव-गांव सर्वे हुए, कागजी सुधार भी हुए—पर न मुआवजे की स्पष्टता आई, न पुनर्वास की ठोस योजना।
नतीजा—भरोसा टूटा, आक्रोश फिर भड़क उठा।

बैठकों का सिलसिला जारी, समाधान अब भी लापता-24 अप्रैल को खजुराहो के क्लार्क होटल में हुई उच्चस्तरीय बैठक भी महज औपचारिकता बनकर रह गई।

प्रशासन ने फिर 20 दिन का समय मांगा—और यहीं से ग्रामीणों का धैर्य जवाब देने लगा।

ग्रामीणों का साफ कहना है—हर बैठक के बाद तारीख बदलती है, हमारी किस्मत नहीं।”

कदवारा महापंचायत: प्रशासन के लिए सीधी चेतावनी-आज की महापंचायत प्रशासन के लिए अल्टीमेटम है।सैकड़ों गांवों से लोग जुटकर अब अपनी सामूहिक रणनीति तय करेंगे।
संदेश बिल्कुल स्पष्ट है—अब मीटिंग और सर्वे नहीं… लिखित, समयबद्ध समाधान चाहिए।”

कई परियोजनाओं के विस्थापित एक मंच पर, बन रहा बड़ा जनआंदोलन

यह आंदोलन अब स्थानीय नहीं रहा—बल्कि व्यापक जनसंग्राम का रूप ले चुका है।महापंचायत में इन प्रमुख परियोजनाओं से प्रभावित लोग शामिल होंगे—

  • केन–बेतवा लिंक परियोजना
  • मझगांव मध्यम सिंचाई परियोजना
  • रूंझ सिंचाई परियोजना
  • नैगुवां लघु सिंचाई परियोजना
  • NTPC परियोजना

यानी अब सवाल सिर्फ एक गांव का नहीं—विकास बनाम विस्थापन की नीति पर सीधा जनचुनौती बन चुका है।

अगला कदम निर्णायक हो सकता है

कदवारा में उमड़ता यह जनसैलाब अब सिर्फ पीड़ा व्यक्त करने नहीं, बल्कि अधिकार लेकर लौटने की मनःस्थिति में है।

क्षेत्र में चर्चा तेज है कि यदि अब भी ठोस निर्णय नहीं हुआ, तो आंदोलन और अधिक उग्र, व्यापक और निर्णायक रूप ले सकता है।

यह साफ संकेत है—अब विस्थापित चुप नहीं बैठेंगे।यह लड़ाई अब मांगपत्रों से आगे बढ़कर सम्मानजनक पुनर्वास और न्यायपूर्ण मुआवजे की अंतिम जंग बन चुकी है।

 

DR MAHESH PRASAD MISHRA
Author: DR MAHESH PRASAD MISHRA

Recognized globally and nationally for leadership in infrastructure development, social impact, and nation-building, with multiple international awards, honorary doctorate, and prestigious recognitions for excellence, innovation, and societal contribution.

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