“दिनदहाड़े सिर कलम: जौनपुर में कानून का खौफ खत्म, प्रशासन 40 साल सोता रहा!”

उत्तर प्रदेश के जौनपुर के कब्रुद्दीनपुर गांव में जो हुआ, वह सिर्फ एक हत्या नहीं—यह कानून-व्यवस्था की खुली नाकामी है।

एक युवक, अनुराग यादव—जो 5 बहनों का इकलौता भाई था, एक प्रतिभाशाली छात्र और अंतरराष्ट्रीय स्तर का ताइक्वॉन्डो खिलाड़ी—उसे उसके ही घर के बाहर दिनदहाड़े तलवार से सिर काटकर मौत के घाट उतार दिया गया।

और यह सब अचानक नहीं हुआ। यह 40 साल पुराने जमीन विवाद का नतीजा है।

अब सवाल सीधा है—
👉 जब विवाद 40 साल पुराना था, तो प्रशासन क्या कर रहा था?
👉 क्या स्थानीय पुलिस को इस तनाव की जानकारी नहीं थी?
👉 या फिर हर बार की तरह किसी बड़ी घटना का इंतजार किया जा रहा था?

यह घटना साबित करती है कि कई जगहों पर कानून का डर खत्म हो चुका है, और अपराधी इतने बेखौफ हैं कि दिन के उजाले में भी हत्या करने से नहीं डरते।

घटना के बाद डीएम, एसपी और पुलिस बल का पहुंचना केवल एक औपचारिकता बनकर रह गया है।
असल जिम्मेदारी तो इस बात की है कि ऐसी नौबत आई ही क्यों?

एक तरफ सरकार कानून-व्यवस्था को मजबूत होने का दावा करती है,
वहीं दूसरी तरफ जमीनी हकीकत यह है कि
👉 पुराने विवाद सुलझाने की कोई ठोस व्यवस्था नहीं
👉 स्थानीय स्तर पर निगरानी और रोकथाम की कमी
👉 और आम नागरिक की सुरक्षा भगवान भरोसे

सीधा सवाल “अगर 40 साल का विवाद प्रशासन नहीं सुलझा पाया, तो क्या अब हर विवाद का अंत खून-खराबे से ही होगा?”

“जब व्यवस्था समय पर न्याय नहीं देती, तो समाज में अराजकता जन्म लेती है—और जौनपुर की यह घटना उसी अराजकता का खौफनाक चेहरा है।”

DR MAHESH PRASAD MISHRA
Author: DR MAHESH PRASAD MISHRA

Recognized globally and nationally for leadership in infrastructure development, social impact, and nation-building, with multiple international awards, honorary doctorate, and prestigious recognitions for excellence, innovation, and societal contribution.

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